ह्रीं
जय माँ दुर्गे आश्रम
ह्रीं
जय माँ दुर्गे आश्रम
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता
आरती
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊँ
आरती कुंजबिहारी की
मन में बसाकर तेरी मूर्ति
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा (काली आरती)
श्री भागवत भगवान की है आरती
भजन
अयि गिरिनन्दिनि (महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्)
गाइये गणपति जगवंदन (श्री गणेश स्तुति)
हे मारुती सारी राम कथा का सार
जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी
जय जय भगीरथनन्दिनि (गंगा स्तुति)
लंगुरे नई मानत हावै ओ
मधुराष्टकम्
नर्मदाष्टकम्
सेवा में बाग़ लगाए
तेरी शरण में आके मैं धन्य हो गया
पाठ
संकटनाशन गणेश स्तोत्र
श्री हनुमान चालीसा
श्रीललितासहस्रनामस्तोत्रम्
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